मुस्कुराते रहिये

मैं उसको सैनीटाइज़र भेजता रह गया…🧴💦….😍

गौर फरमाएं,

मैं….उसको….सैनीटाइज़र भेजता रह गया…🧴💦…🥰

और वो ज़ालिम,

किसी और के साथ “क्वारेनटाइन” हो गयी…!! 👰🏻🤵🏻….😭

शायर “कोरोना’दास लट्ठ खा के..”

सोच रहा हूँ तुमसे बोलूं by राग रामेश्वर

सोच रहा हूं तुमसे बोलूं
पानी में जैसे हींग सा घोलूं
तेरी चुप्पी टूट जाए
बोल! मैं ऐसा क्या बोलूं

सोच रहा हूं तुमसे बोलूं..

चल हम दोनों यूं खो जाएं
कोहरे जैसे बादल हो जाएं
ख़्वाब उनींदे दस्तक देते
मन की खिड़की होलै से खोलूं

सोच रहा हूं तुमसे बोलूं..
-राग रामेश्वर

देखिये साहब

किसी को दिल में उतारकर, देखिए साहब,
अपने अहम को मारकर, देखिए साहब।

संवर जाती है सारी जिंदगी अपनी पल में,
कभी ‘उसे’ अपना बनाकर, देखिए साहब ।

दुखों के पर्वतों ने हार मानी है एक दिन,
हृदय से प्रभु को गुनगुनाकर, देखिए साहब ।

राम आएंगे बेर खाने स्वयं ही चलकर,
खुद को शबरी में ढालकर, देखिए साहब।

सुरेश मिश्र